Share This Post

Share on facebook
Share on linkedin
Share on twitter
Share on email

जिसने गढ़ा वजूद तुम्हारा भाव उन्हीं के पढ़े नहीं
मात-पिता भेजे वृद्धाश्रम किंतु शर्म से गड़े नहीं
ईश्वर में तो रखी आस्था लेकिन वो ये भूल गए
सृष्टि के निर्माता भी तो मात-पिता से बड़े नहीं
                                     –  डॉ रसिक गुप्ता