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अलविदा

मैं तुम्हारी याद को तकिया बनाकर
आँख सपनो से भिगोना चाहता हूँ
अलविदा कह दो मुझे ऐ दोस्त मेरे
चैन की अब नींद सोना चाहता हूँ

जिनकी ऊँगली को पकड़कर मैं चला था
उनको काँधे पर उठाकर छोड़ आया
साँझ वो ऐसी ढली की आज तक ना
मेरे आंगन में कभी भी भोर आया

अब अंधेरा बादलो का ओढ़कर मैं,
चाँद पर ही एक बिछौना चाहता हूँ
अलविदा कह दो मुझे ऐ दोस्त मेरे
चैन की अब नींद सोना चाहता हूँ

रिश्ते नाते दोस्ती व प्यार के
रंग अनगिन हैं यहाँ संसार में
कर्ज़ जीवन का चुकाने के लिए,
बन खिलौना बिक गये बाजार में

बस नदी की धार बनना चाहता हूँ,
मैं मकाँ से रेत होना चाहता हूँ।
अलविदा कह दो मुझे ऐ दोस्त मेरे
चैन की अब नींद सोना चाहता हूँ

नवीन कुमार सिंह

kolkata